भारतीय सेना अपने टी-90 टैंकों को रात्रि-युद्ध तकनीक से लैस करेगी
इस क्षेत्र में भारत अब चीन और पाकिस्तान के साथ बराबरी करने की कोशिश कर रहा है। भारत के पास कुल जितने टैंक हैं, उनमें से आधे टैंक ही रात में युद्ध कर सकते हैं। जबकि पाकिस्तान के 80 प्रतिशत और चीन के 100 प्रतिशत टैंक रात में युद्ध करने के सभी उपकरणों से लैस हैं।
अब भारत के टैंक रात के अन्धेरे में बेकार नहीं हो जाया करेंगे क्योंकि भारतीय सेना ने भी टी-90 सहित अपने सभी टैंकों को रात्रि के समय युद्ध करने की सभी तरह की उच्च तकनीक और उपकरणों से लैस करना शुरू कर दिया है।
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भारत की सेना ने अपने टी-90 टैंकों के लिए रात के अन्धेरे में दूर तक देखने वाली 1,400 ताप-दृश्य आधारित संलयन प्रौद्योगिकी दूरबीनें ख़रीदने की योजना बना ली हैं। और आने वाले पाँच सालों के भीतर-भीतर भारतीय सेना अपने सभी टैंकों में लगी पुरानी दूरबीनों की जगह नई शक्तिशाली ऐसी दूरबीनें लगा देगी, जिनसे ये टैंक रात या दिन में किसी भी समय यानी चौबीसों घण्टे युद्ध कर सकेंगे।
यह नई क़िस्म की बहुत अधिक शक्तिशाली ताप आधारित दूरबीन है, जो अन्धेरे में भी काफ़ी दूर तक नज़र रख सकती है। इन नई दूरबीनों को टी-90 टैंकों में आजकल लगाई जा रही पुरानी दूरबीनों की जगह इस्तेमाल किया जाएगा, जिसकी वजह से टी-90 टैंक अपने सामने अधिक दूरी तक नज़र रख सकेंगे और हर उस चीज़ को देक सकेंगे जो तापयुक्त होगी।
इस ताप आधारित दूरबीन की नियमित देखभाल भी नहीं करनी होगी, इसलिए इसका खर्च भी कम होगा और तुरत-फुरत की जाने वाली कार्रवाइयों में इसका सुगमता से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
भारत के सुरक्षा विश्लेषक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राहुल भोंसले ने कहा — अभी भारत में ऐसी कोई कम्पनी नहीं है, जो इस तरह की दूरबीनें बना सकती हो। यहाँ तक कि विदेशी सहयोग से भी भारत में इन नई क़िस्म की बेहतरीन दूरबीनों का उत्पादन करना सम्भव नहीं है। इसलिए भारतीय सेना को यह दूरबीनें विदेशी कम्पनियों से ही ख़रीदनी पड़ेंगी। हालाँकि भारत के रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन ने इस तरह की एक दूरबीन बनाने का दावा किया है, लेकिन अभी तक यह बात नहीं मालूम हुई है कि किसी भारतीय कम्पनी को यह दूरबीन उत्पादन करने के लिए दी गई है या नहीं।
भारत के रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन द्वारा 45 डिग्री Х 34 डिग्री के 150 मीटर दूर तक के दृश्यों को देखने के लिए एक ताप आधारित टैंक दूरबीन का विकास कर लिया गया है।
सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर भोंसले ने कहा — यह दूरबीन रात के अन्धेरे में लड़ाई के मैदान में टैंकों को पैंतरेबाज़ी करने की क्षमता प्रदान करेगी। इससे उनकी रात में लड़ने की क्षमता में सुधार होगा।
विगत नवम्बर माह में भारत के रक्षामन्त्री मनोहर पर्रीकर की अध्यक्षता में हुई भारतीय रक्षा ख़रीद परिषद की बैठक में क़रीब 2 अरब 10 करोड़ डॉलर में रूस से 464 टी-90 टैंकों की ख़रीद के सौदे को स्वीकृति प्रदान की गई थी। भारतीय सेना के पास आजकल क़रीब 2 हज़ार 500 पुराने टी-72 टैंक हैं, जिन्हें सेना सन् 2020 तक बदलना चाहती है। स्वदेशी टैंक अर्जुन के वज़न में काफ़ी भारी होने के कारण भारतीय सेना को अब टी-90 टैंकों पर ही निर्भर होना होगा। अब भारत सन् 2020 तक और 1600 टी-90 टैंक ख़रीदना चाहता है, जिन्हें वह पाकिस्तान के साथ लगने वाली अपनी पश्चिमी सीमा पर तैनात करेगा।
पहली बार स्पूतनिक में प्रकाशित।
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