रूसी भालू अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं
रूस ने एक नई क़िस्म की बख़्तरबन्द गाड़ी बनाई है
हाल ही में मास्को में अन्तरराष्ट्रीय सैन्य सम्मेलन ’आर्मी-2016’ के दौरान दुनिया की एक सबसे बड़ी हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इस प्रदर्शनी में रूस ने पारम्परिक तौर पर पेश किए जाने वाले टैंकों और लड़ाकू विमानों के अलावा एक नई क़िस्म का हथियार भी प्रदर्शित किया था, जिसे देखकर विदेशी प्रतिनिधिमण्डलों के सदस्य और विदेशी मेहमान आश्चर्यचकित रह गए थे। यह हथियार था – नई पीढ़ी की ’मिदवेद’ यानी भालू नामक आधुनिकतम बख़्तरबन्द गाड़ी।
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हथियार प्रदर्शनी में यह नई बख़्तरबन्द गाड़ी ’सैन्य-उद्योग कम्पनी’ के मण्डप में रखी हुई थी। इस बख़्तरबन्द गाड़ी का रूप-रंग और आकार-प्रकार देखकर भालू की याद आ जाती है, इसीलिए इसका नाम ’मिदवेद’ यानी भालू रखा गया है। यह नई बख़्तरबन्द गाड़ी छह मीटर लम्बी है और ढाई मीटर चौड़ी। इस बख़्तरबन्द गाड़ी को दूर से ही देखकर पहचाना जा सकता है क्योंकि इसकी ऊँचाई किसी भी सामान्य मोटर-कार से तीन गुना ज़्यादा है। इस बख़्तरबन्द गाड़ी का वज़न भी किसी हल्के टैंक की तरह ही क़रीब 12 टन है। बख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ में अपने हथियारों और साजो-सामान के साथ लैस होकर 8 आदमी बैठ सकते हैं। इनके अलावा ’मिदवेद’ का चालक तो होगा ही। यह गाड़ी बेहद मजबूत है और विशेष क़िस्म के ज़िरिह-बख़्तर से लैस है।
ज़िरिह-बख़्तर पर ज़ोर
इस बख़्तरबन्द गाड़ी का डिजाइन तैयार करते हुए डिजाइनरों ने इसकी मजबूती और ज़िरिह-बख़्तर पर ख़ास ज़ोर दिया है। इसके लिए गाड़ी की बॉडी को धातु की दोहरी परत से बनाया गया है और दोनों परतों के बीच कुछ जगह ख़ाली छोड़ दी गई है। इस ख़ाली जगह की वजह से ही बख़्तर को छेद देने वाली गोलियाँ भी इस बख़्तरबन्द गाड़ी पर कोई असर नहीं करेंगी। इसके अलावा इस गाड़ी में यह सम्भावना भी छोड़ी गई है कि इसे और ज़्यादा मजबूत बनाया जा सकता है। इसलिए आज दुनिया भर में ’मिदवेद’ सबसे मजबूत और सबसे सुरक्षित गाड़ी है। जब इस गाड़ी के परीक्षण किए गए और इसकी मजबूती की जाँच की गई तो इस में लगा काँच और इसके दरवाज़े भी बेहद सुरक्षित पाए गए।
/ Vitaly V. Kuzmin
यह नई बख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ जिन हथियारों से लैस है, उनकी वजह से इसका इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है। वैसे सच-सच कहा जाए तो इस पर परिस्थिति के अनुसार विभिन्न प्रकार के हथियार तैनात किए जा सकते हैं। इस बख़्तरबन्द गाड़ी पर अलग-अलग क़िस्म की, अलग-अलग कैलीबर की मशीनगनें लगाई जा सकती हैं और अगर ज़रूरत हो तो टैंकरोधी निर्देशित मिसाइलें छोड़ने के लिए मिसाइल-तोप भी लगाई जा सकती है। इस तरह इस बख़्तरबन्द गाड़ी का इस्तेमाल पुलिस भी कर सकती है और सेना भी और किन्हीं भी स्थितियों में इस बख़्तरबन्द गाड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है – युद्ध के मैदान में युद्ध लड़ने के लिए भी और दंगों के दौरान दंगाइयों से निपटने के लिए भी।
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चेचनिया युद्ध के सबक
रूस के उत्तरी कोहकाफ़ के इलाके में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ लड़ते हुए सेना और पुलिस को जिन मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ा था, उनसे सबक लेकर ही इस बख़्तरबन्द गाड़ी को तैयार किया गया है। पुरानी बख़्तरबन्द गाड़ियाँ बारूदी सुरंगों के सामने बेकार हो जाती थीं और उन पर तैनात हथियार भी बेहद कमज़ोर साबित हुए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि बख़्तरबन्द गाड़ियों का काम वहाँ टैंकों को करना पड़ा, जिसके अपने ख़तरे और अपने जोखिम रहे। 1994 में चेचनिया की राजधानी ग्रोज़्नी में जब रूसी टैंकों को हमला करना पड़ा तो वह अनुभव बड़ा नाकाम अनुभव रहा। उसी अनुभव को देखकर यह तय किया गया था कि एक नई क़िस्म की बख़्तरबन्द गाड़ी बनाई जानी चाहिए।
नई बख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ का निर्माण करते हुए इस बात का ख़याल रखा गया है कि वह बारूदी सुरंगों का बख़ूबी सामना कर सके। इसीलिए इस गाड़ी का तला ज़मीन से काफ़ी ऊँचा रखा गया है और उसे विशेष रूप से मजबूत बनाया गया है ताकि यह बख़्तरबन्द गाड़ी भारी बारूदी सुरंगों में होने वाले धमाकोंं को भी आराम से झेल जाए। रूस के रक्षा मन्त्रालय के परीक्षण मैदान में इस बख़्तरबन्द गाड़ी का परीक्षण करते हुए 7 किलो टीएनटी की सुरंग इसके नीचे फटी’ लेकिन इसके बावजूद बख़्तरबन्द गाड़ी को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा। गाड़ी का ढाँचा जैसा का तैसा सुरक्षित रहा और गाड़ी में बैठे सैनिकों को भी कोई नुक़सान नहीं पहुँचा।
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यही नहीं, इस नई बख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ में ऐसे विशेष उपकरण भी लगे हुए हैं, जो रेडियो नियन्त्रित बमों को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। इसमें धुआँ बमों से बचने की प्रणाली भी लगी हुई है। इस वजह से यह बख़्तरबन्द गाड़ी अपने आसपास उपस्थित दूसरे वाहनों को भी सुरक्षित रख सकती है।
उपयोग की सम्भावनाएँ
इन तमाम ख़ासियतों के बावजूद तुरन्त ही हमें यह भी अन्दाज़ हो जाता है कि इस बख़्तरबन्द गाड़ी का इस्तेमाल भारी और भयावह युद्ध की स्थितियों में नहीं किया जा सकता है। बारूदी सुरंगों और बमों से सुरक्षित होने के बावजूद यदि मोर्टार तोप का कोई गोला सीधे इस गाड़ी पर गिरेगा तो इस गाड़ी का काम-तमाम हो सकता है। इसके लिए यह ज़रूरी है कि इस बख़्तरबन्द गाड़ी को और मजबूत बनाया जाए। अरज़ामास इंजीनियरिंग कारख़ाने के डिजाइनर, जहाँ इस बख़्तरबन्द गाड़ी का उत्पादन किया जाता है, आजकल इसी समस्या को हल करने में लगे हुए हैं।
लेकिन नई बख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ का इस्तेमाल युद्ध में नहीं हो सकता, इसका यह मतलब तो नहीं है कि दूसरी जगहों पर भी इसका इस्तेमाल न किया जाए। रूस के गृह मन्त्रालय ने और हाल ही में बनाए गए नए सुरक्षा बल ’राष्ट्रीय गारद’ ने इस नई बख़्तरबन्द गाड़ी में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। अपनी तकनीकी विशेषताओं के कारण ’बख्ख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ का इस्तेमाल आतंकवाद रोधी सैन्य-कार्रवाइयों में किया जा सकता है। कुछ देशों ने भी इस नई बख़्तरबन्द गाड़ी को ख़रीदने में दिलचस्पी दिखाई है। हथियारों की दुनिया की एक सबसे बड़ी प्रदर्शनी ’आर्मी-2016’ में अर्जेण्टीना और नाइजीरिया जैसे कई देशों के रक्षा मन्त्रालयों ने नई बख़्तरबन्द गाड़ी ’मिदवेद’ को ख़रीदने के बारे में बातचीत शुरू कर दी है।
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