कर्याकिन की हार के बावजूद शतरंज में रूस की जीत हुई
11 से 30 नवम्बर 2016 को न्यूयार्क में विश्व शतरंज चैम्पियनशिप की उपाधि के लिए खेली गई बाज़ियों के दौरान रूस में शतरंज में लोग इतनी दिलचस्पी लेने लगे कि वो लोग भी इसकी ख़बर पूछते रहते थे, जो यह नहीं जानते कि शतरंज कैसे खेली जाती है। मीडिया में इस शतरंज चैम्पियनशिप से जुड़ी ख़बरों को तरजीह दी जा रही थी और विश्लेषक बड़ी सक्रियता से हर बाज़ी का, हर चाल का विश्लेषण कर रहे थे। रूस के खेल क्लबों में भी हर बाज़ी का सीधा प्रसारण किया जा रहा था। ऐसा लग रहा था कि मानो सोवियत सत्ता काल का पुराना दौर वापिस आ गया है और रूस का हर आदमी शतरंज का दीवाना है।
जबरदस्त जोश
लम्बे समय तक विश्व शतरंज चैम्पियन का ताज सोवियत खिलाड़ियों के पास बना रहा। इसलिए शतरंज को लेकर सोवियत नागरिकों में गर्व की भावना दिखाई देती थी। लेकिन धीरे-धीरे शतरंज में रूसी लोगों की दिलचस्पी ख़त्म हो गई। यहाँ तक कि सन् 2008 के बाद किसी रूसी शतरंज खिलाड़ी ने यह दावा भी नहीं किया कि वह विश्व शतरंज चैम्पियनशिप में खेलना चाहता है। इस तरह रूस में लोगों ने शतरंज को लगभग पूरी तरह से भुला दिया था।
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लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया, जब पिछले वसन्तकाल में 26 वर्षीय रूसी नागरिक सिर्गेय कर्याकिन ने उस टूर्नामेण्ट में विजय प्राप्त कर ली, जिसे जीतने के बाद वे नॉर्वे के शतरंज खिलाड़ी और विश्व शतरंज चैम्पियन मैगनस कार्लसन को चुनौती दे सकते थे।
हालाँकि शतरंज विशेषज्ञ और सट्टेबाज़ नॉर्वे के शतरंज खिलाड़ी को ही बेहतर खिलाड़ी बता रहे थे, लेकिन जब-जब रूसी खिलाड़ी उनकी बात का विरोध करके शतरंज चैम्पियन के ताज पर अपना दावा प्रकट करते, वैसे-वैसे आम रूसी लोगों में जोश और उत्साह बढ़ता जा रहा था। रूसी मीडिया भी इस दीवानगी में शामिल हो चुका था और सबसे पहले विश्व शतरंज चैम्पियनशिप से जुड़ी ख़बरें ही प्रसारित करता था। सात बाज़ियाँ बराबर छूटने के बाद, जब रूसी शतरंज खिलाड़ी सिर्गेय कर्याकिन ने मैगनस कार्लसन से पहली बाज़ी जीती तो रूसी मीडिया में जैसे कोई धमाका ही हो गया। अब रूस के वे आम लोग भी शतरंज के इस मैच में दिलचस्पी दिखाने लगे, जिन्हें अभी तक शतरंज से कोई लेना-देना नहीं था। प्राचीन भारत में जन्म लेने वाला यह पुराना-प्राचीन खेल अब हर रूसी आदमी की नज़र में था।
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दिलचस्पी का कारण
शतरंज के इस मैच में आम रूसी लोगों की दिलचस्पी का सबसे बड़ा कारण यह था कि सिर्गेय कर्याकिन को इस मैच से पहले कोई नहीं जानता था। किसी ने उनका नाम भी नहीं सुना था। जबकि मैगनस कार्लसन को सारी दुनिया जानती-पहचानती थी। रूसी लोगों की दिलचस्पी इस बात में थी कि यह अनजान रूसी शतरंज खिलाड़ी क्या अचानक शतरंज के सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर शतरंज के योद्धा मैगनस कार्लसन का सामना कर सकेगा। और सिर्गेय कर्याकिन लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। इसीलिए जब 2 दिसम्बर को सिर्गेय कर्याकिन मैगनस कार्लसन के साथ विश्व शतरंज चैम्पियनशिप का मैच खेलकर न्यूयार्क से वापिस मस्क्वा पहुँचे तो विश्व शतरंज चैम्पियनशिप में हुई हार के बावजूद उनका राष्ट्रीय नायक की तरह भावभीना स्वागत किया गया। विश्व शतरंज चैम्पियन अलिक्सान्दर कस्तिन्यूक के प्रशिक्षक और पिता कंस्तान्तिन कस्तिन्यूक ने कहा — शतरंज को लेकर यह जोश रूस में इसलिए भी दिखाई देता है क्योंकि रूस और पश्चिम के बीच हमेशा एक राजनीतिक टकराव बना रहता है।
कंस्तान्तिन कस्तिन्यूक ने कहा — विश्व शतरंज चैम्पियनशिप के ताज के लिए न्यूयार्क में हुआ यह मैच इसलिए भी दुनिया में दिलचस्पी का कारण बना क्योंकि सिर्गेय कर्याकिन को एक खिलाड़ी के रूप में पहले दुनिया भर में कोई नहीं जानता था और एक ’आउटसाइडर’ के रूप में खेलने के बावजूद उन्होंने मैगनस कार्लसन को बराबर की टक्कर दी। सिर्गेय कर्याकिन के बहुत से ऐसे लोग भी प्रशंसक बन गए, जिनके लिए शतरंज का खेल एकदम अनजाना है। लेकिन यह तो मानना ही पड़ेगा कि मैगनस कार्लसन ने पूरे मैच के दौरान अपना दबाव बनाए रखा और सिर्गेय कर्याकिन को हमेशा बचाव में ही खेलना पड़ा। कंस्तान्तिन कस्तिन्यूक ने कहा — कर्याकिन ने जिस बहादुरी से मैगनस कार्लसन का सामना किया उसके लिए हम उनकी तारीफ़ करते हैं, लेकिन कार्लसन के खेल का, उनकी प्रतिभा का लोहा भी सारी दुनिया मानती है।
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