मुम्बई में हुए रूसी फ़िल्म महोत्सव में दर्शकों की भारी भीड़
विगत शुक्रवार को बालीवुड की नगरी मुम्बई में दूसरा ’रूसी फ़िल्म महोत्सव’ समाप्त हो गया। इस रूसी फ़िल्मी मेले में यह सूचना भी मिली कि दो देशों के फ़िल्मकारों के बीच आपसी सहयोग की चर्चा अब वास्तविक रूप ग्रहण करने जा रही है।
फ़िल्मनगरी मुम्बई में पहला रूसी फ़िल्म महोत्सव सन् 2015 में हुआ था। इस साल हुए फ़िल्म महोत्सव में आधुनिक रूसी सिनेमा की विभिन्न शैलियों और विभिन्न विषयों से जुड़ी आठ नई फ़ीचर फ़िल्में प्रस्तुत की गई। यह फ़िल्म महोत्सव मुम्बई के आधुनिकतम सिनेमा केन्द्र सिनेपोलिस अन्धेरी में सम्पन्न हुआ। 15 नवम्बर को रूसी फ़िल्म महोत्सव की शुरूआत मुम्बई के पुराने रॉयल ऑपेरा हाउस हुई, जो हाल ही में पुनर्निमाण के बाद फिर से शुरू हुआ है।
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’फ़िल्म फ़ोरम’ नामक रूसी संस्था की प्रतिनिधि और रूसी फ़िल्मकार संघ की सलाहकार फ़िल्म निर्माता मरीया लेमिशिवा ने बताया — पुनर्निमाण के बाद रॉयल ऑपेरा हाउस के फिर से शुरू होने के बाद रूसी फ़िल्म महोत्सव ऑपेरा हाउस में आयोजित दूसरा समारोह था, इसलिए इस महोत्सव में भाग लेने के लिए स्थानीय पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे। पिछले साल हुए पहले रूसी फ़िल्म महोत्सव के समय पत्रकारों की संख्या कम थी। लेकिन अब पत्रकार ख़ुद ही यह समझ रहे हैं कि रूसी फ़िल्म महोत्सव में पहुँचना और उसके बारे में लिखना ज़रूरी है।
रूसी फ़िल्म महोत्सव के दौरान सबसे पहले लाल कालीन पर रूसी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की परेड हुई। इसके बाद आयोजकों ने अपनी बात दर्शकों के सामने रखी और उसके बाद फ़िल्म निर्देशक झोरा क्रीझोवनिकफ़ की फ़िल्म ’बेहतर दिन’ के प्रदर्शन से रूसी फ़िल्म महोत्सव का उद्घाटन किया गया। यह फ़िल्म मुम्बई के दर्शकों को बेहद पसन्द आई।
हालाँकि भारतीय दर्शक रूसी मानसिकता को और रूसी हास्य-बोध को पूरी तरह से नहीं समझ पाए, लेकिन फिर भी इस फ़िल्म को भारतीय दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया। इस फ़िल्म के अलावा रूसी फ़िल्म महोत्सव में सात अन्य रूसी फ़िल्में दिखाई गईं।
महोत्सव में दिखाई जाने वाली कई फ़िल्में तो एकदम नई थीं, जैसे नूरबेक एगेन की फ़िल्म ’हथौड़ा’ और अक्साना करास की फ़िल्म ’अच्छा लड़का’। निकलाई ख़मेन्का की फ़िल्म ’बर्फ़तोड़क’ और येव्गेनिया शिल्याकिना की फ़िल्म ’शुक्रवार’ भी एकदम नई फ़िल्में हैं, जो अभी पन्द्रह दिन पहले ही रूस में रिलीज हुई हैं।16 नवम्बर को प्रसिद्ध रूसी फ़िल्म निर्देशक पाविल लुंगीन की फ़िल्म ’हुक्म की बेगम’ दिखाई गई। यह फ़िल्म मुम्बई में रूस में फ़िल्म रिलीज होने से एक दिन पहले ही प्रदर्शित कर दी गई। इसके अलावा निकलाई लेबिदेफ़ की फ़िल्म ’चालक दल’ और अन्तोन कवलेन्का की फ़िल्म ’औरतें’ भी दिखाई गई।
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विगत शुक्रवार को ’शुक्रवार’ और ’बर्फ़तोड़क’ फ़िल्मों से मुम्बई में रूसी फ़िल्म महोत्सव का समापन हो गया। आयोजकों के अनुसार, कुल मिलाकर सात हज़ार से ज़्यादा दर्शकों ने रूसी फ़िल्में देखीं। इस साल दर्शकों की संख्या पिछले रूसी फ़िल्म महोत्सव के मुक़ाबले दो हज़ार ज़्यादा रही।
फ़िल्म निर्माता और मुम्बई में रूसी फ़िल्म महोत्सव की एक आयोजक मरीया लेमिशिवा ने बताया — इस फ़िल्म महोत्सव का एक मुख्य परिणाम यह रहा कि फ़िल्मों के क्षेत्र में रूसी-भारतीय सहयोग अब व्यावहारिक रूप ग्रहण कर रहा है। पिछले 25 सालों में दो देशों ने इस दिशा में कोई सहयोग नहीं किया है, इसलिए भारत में लोग रूसी फ़िल्मों को भूल से गए हैं, जबकि रूस में आज भी भारतीय फ़िल्मों के दर्शक बड़ी संख्या में उपस्थित हैं।
मरीया लेमिशिवा ने कहा — पिछले फ़िल्म महोत्सव में तो हमें सारा काम एकदम शून्य से फिर शुरू करना पड़ा था। हमें भारतीय फ़िल्मकारों और दर्शकों को यह समझाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी कि हम कौन हैं और किस तरह की फ़िल्में बनाते हैं। भारतीय दर्शक रूसी फ़िल्म निर्माताओं, रूसी अभिनेताओं और रूसी फ़िल्मों के बारे में बिल्कुल कुछ भी नहीं जानते थे। हमें ऐसा लग रहा था, मानो हम किसी दूसरे ग्रह पर पहुँच गए हैं।
मरीया लेमिशिवा ने कहा — इस तरह यदि मुम्बई में पिछले रूसी फ़िल्म महोत्सव के समय भारतीय फ़िल्मकारों और रूसी फ़िल्मकारों का सिर्फ़ आपस में परिचय हुआ था, तो इस बार हम लोगों ने एक-दूसरे के सामने आपसी सहयोग करने से जुड़े अनेक प्रस्ताव पेश किए। इसलिए हमारे इस दूसरे फ़िल्म महोत्सव का सबसे प्रमुख परिणाम यह रहा कि हमारे बीच आपसी सहयोग के बारे में ठोस बातचीत शुरू हुई। हमसे मिलने के लिए ऐसे कई भारतीय फ़िल्म प्रोड्यूसर आए, जो अपने साथ विभिन्न प्रकार का सहयोग करने के प्रस्ताव लेकर आए थे। हमारे सामने कुछ ठोस परियोजनाएँ रखी गईं और कुछ ठोस सवाल उठाए गए।
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मुम्बई में आयोजित इस रूसी फ़िल्म महोत्सव में ही यह घोषणा भी की गई कि भारत के सिने स्टार शाहरुख खान रूसी फ़िल्म ’वीय-3’ (भूत) में काम करेंगे। इस फ़िल्म की कहानी भारत से जुड़ी हुई है। फ़िल्म के प्रोड्यूसर अलिक्सेय पित्रूख़िन ने बताया कि इस फ़िल्म की शूटिंग भारत में होगी। फ़िल्म के निर्माता आजकल यह तय कर रहे हैं कि फ़िल्म के कौन-कौन से हिस्से भारत में फ़िल्माए जाएँगे। शुरू में यह तय किया गया था कि फ़िल्म का एक छोटा-सा हिस्सा ही भारत में फ़िल्माया जाएगा, जिसमें भारत की प्रकृति के जीवन्त दृश्य होंगे। फ़िल्म के वे दृश्य जो किसी इमारत के भीतर घट रहे होंगे, चीन और चेक गणराज्य में फ़िल्माए जाने की योजना थी।
फ़िल्म के प्रोड्यूसर अलिक्सेय पित्रूख़िन ने बताया — लेकिन अब भारतीय फ़िल्मकारों ने अपने स्टूडियो हमें दिखाए हैं। हम फ़िल्म की शूटिंग में कम से कम खर्च करना चाहते हैं, लेकिन हम यह भी समझते हैं कि भारत में शूटिंग करने के अपने फ़ायदे हैं। अब हम महीने-दो महीने में यह तय कर लेंगे कि भारत में इस फ़िल्म के कौन-कौन से दृश्य फ़िल्माए जाएँगे। इसके अलावा मरीया लेमिशिवा ने बताया कि ’चालक-दल’ और ’बर्फ़तोड़क’ नाम की दो रूसी फ़िल्मों को भारत में रिलीज करने की तैयारी भी की जा रही है।
भावी योजनाओं की चर्चा करते हुए मरीया लेमिशवा ने कहा कि आने वाले पाँच सालों में मुम्बई में रूसी फ़िल्म महोत्सव का नक़्शा पूरी तरह से बदल देने की बात सोच ली गई है। भारत में पूरे साल बीच-बीच में रूसी फ़िल्मों के प्रदर्शन किए जाते रहेंगे ताकि दर्शकों की दिलचस्पी रूसी फ़िल्मों में बनी रहे। फिर साल के अन्त में भव्य रूसी फ़िल्म महोत्सव आयोजित किया जाया करेगा, जिसमें बड़ी संख्या में रूसी अभिनेता और अभिनेत्रियाँ तथा अन्य फ़िल्मकार भाग लिया करेंगे।
पहली बार रिया नोवोस्ती में प्रकाशित।
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